Monday, 19 April 2021

भोजन संबंधित कुछ टिप्स।

 

  • दूध ना पचे तो ~ सोंफ। 

  • दही ना पचे तो ~ सोंठ। 

  • छाछ ना पचे तो ~ जीरा व काली मिर्च। 

  • अरबी (घुइयां) व मूली ना पचे तो ~ अजवायन। 

  • कड़ी ना पचे तो ~ कड़ी पत्ता। 

  • तैल, घी, ना पचे तो ~  कलौंजी... 

  • पनीर ना पचे तो ~ भुना जीरा। 

  • भोजन ना पचे तो ~ गर्म जल। 

  • केला ना पचे तो  ~ इलायची का उपयोग करें।

  • खरबूजा ना पचे तो ~ मिश्री का उपयोग करें... 

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  • योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।

  • लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है।

  • कूबड़ निकलना - फास्फोरस की कमी।

  • कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है, फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं।

  • दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी।

  • सिजेरियन आपरेशन - आयरन, कैल्शियम की कमी।

  • अस्थमा, मधुमेह, कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं।

  • पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है।

  • जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें।

  • गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें।

  • मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए।

  • सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें।

  • अस्थमा में नारियल दें। नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है।दालचीनी + गुड + नारियल दें।

  • रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं।

  • हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है।

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  • हाई वी पी में -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे।

  • लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें।

  •  ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।

  • किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये।

  • गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है। गिलास अंग्रेजो (पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है

  • RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता। कुएँ का पानी पियें। बारिस का पानी सबसे अच्छा, पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है।

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वात, पित्त, कफ

  • वात के असर में नींद कम आती है।

  • शाम को वात - नाशक चीजें खानी चाहिए।

  • भारत की जलवायु वात प्रकृति की है, दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए।

  • कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।

  • कफ के असर में पढाई कम होती है।

  • पित्त के असर में पढाई अधिक होती है।

  • व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम, पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए। कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए।

  • निद्रा से पित्त शांत होता है, मालिश से वायु शांति होती है, उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास (लंघन) से बुखार शांत होता है।

  • आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा, आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है।

  • चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है

  • त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त, कफ तीनो शांत होते हैं। इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना।

  • गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है।

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  • प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए।

  • जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं, उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है, क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है।

  • बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है, मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22%, तथा पसीना निकलने लगभग 70% शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं

  • सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है।

  • सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें।

  • पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है।

  • छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए, क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है, स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए।

  • रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा।

  • सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है, लकवा, हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है। 

  • रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए। 

  • जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है।

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  • HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा।

  • गर्मियों में बेल, गुलकंद, तरबूज, खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली, सोंठ का प्रयोग करें। 

  • छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है।

  • तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का, दूध हमेशा पतला पीना चाहिए।

  • भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है।

  • कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है। ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है।

  • शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है।

  • भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है, क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है।

  • सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें।

  • अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें।

  • भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें।

  • अवसाद में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस की कमी हो जाती है। फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है।

  • पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है। हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है। हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है।

  • छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है।

  • मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें। त्रिकूट (सोंठ + कालीमिर्च + मघा पीपली) भी दे सकते हैं।

  • चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है।

  • दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है।

  • गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है।

  • जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए।

  • गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें।

  • मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है। दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें। 

  • रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है।

  • भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है।

  • भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए। बाल जल्द सफेद नहीं होगा।

  • अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है। 

  • अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें। 

  • कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए। 

  • बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है।

  • भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है।

  • सुबह के नाश्ते में फल, दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए।

  • रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए। जैसे - दाल, पनीर, राजमा, लोबिया आदि।

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  • जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी करती है।

  • शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें, भोजन के समय टी वी ना देखें।

  • स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है।

  • स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है।

  • तेज धूप में चलने के बाद, शारीरिक श्रम करने के बाद, शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है। 

  • मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान व आग से दूर रहना चाहिए।

  • जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं।

  • जो बीमारी जितनी देर से आती है, वह उतनी देर से जाती भी है।

  • जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए।

  • एलोपैथी ने एक ही चीज दी है, दर्द से राहत। आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी, लीवर, आतें, हृदय खराब हो रहे हैं। एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है।

  • खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए, ब्लड-प्रेशर बढ़ता है। 

  • रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें, पहले जामुनी, फिर नीला ..... अंत में लाल रंग।

  • चिंता, क्रोध, ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज, बबासीर, अजीर्ण, अपच, रक्तचाप, थायरायड की समस्या उतपन्न होती है। 

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  • प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है। बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है।

  • इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है, जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है, इसे ना थूके।

  • वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा।

  • भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है।

  • जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है, वही मोक्ष का अधिकारी है।

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Wednesday, 14 April 2021

COVID-19

उपचार में देरी न करें, जितनी जल्दी बेहतर हो !

संक्रमण, वायरल लक्षण के तीसरे दिन से लक्षण दिखाई देने लगते हैं।


पहला चरण;

  • शरीर का दर्द

  • आंखों में दर्द

  • सिरदर्द

  • उल्टी

  • दस्त

  • बहती नाक या नाक भर जाना

  • अपघटन

  • आँखें जलना

  • पेशाब करते समय जलन

  • बुखार महसूस होना

  • गले में खराश


लक्षणों के दिनों को गिनना बहुत महत्वपूर्ण है: पहला, दूसरा, तीसरा।

बुखार की शुरुआत से ही पहले कार्रवाई  शुरू करें। उपचार में देरी न करें, जितनी जल्दी बेहतर हो !

सावधान रहें, बहुत सारे तरल पदार्थ पीना बहुत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से शुद्ध पानी।  

अपने गले को नम रखने के लिए और अपने फेफड़ों को साफ करने में मदद करने के लिए खूब गुनगुना पानी पिएं।


दूसरा चरण;  (4 वें से 8 वें दिन तक) भड़काऊ या इंफ्लेमेटरी। उपचार में देरी न करें, जितनी जल्दी बेहतर हो !

  • स्वादहीन और / या गंधहीन होना।

  • न्यूनतम प्रयास से ही थकान महसूस करना।

  • सीने में दर्द (रिब, पिंजरे या पसलियों में)

  • छाती का कसना

  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द

  

 वायरस, तंत्रिका अंत पर हमला करता है;

  • थकान और सांस की तकलीफ के बीच का अंतर पता होना चाहिए।

  • बैठा हुआ व्यक्ति हवा का अभाव महसूस करता है - बिना कोई प्रयास किए - और हाफ़ना शुरू कर देता है;

  • थकान तब होती है जब व्यक्ति कुछ सरल करने के लिए घूमता है और थकान महसूस करने लगता है।


 इसमें बहुत अधिक हाइड्रेशन और विटामिन सी की आवश्यकता होती है।


कोविड -19 ऑक्सीजन को बांधता है, इसलिए कम ऑक्सीजन के साथ, रक्त की गुणवत्ता खराब हो जाती है।


हीलिंग तीसरा चरण उपचार में देरी न करें, जितनी जल्दी बेहतर हो !

  • 9वें दिन, उपचार या हीलिंग चरण शुरू होता है, 

  • जो दिन 14 (convalescent) तक रह सकता है


इन सिफारिशों को रखना बेहतर है, रोकथाम कभी भी लेकिन बहुत अधिक नहीं है ! बहुत आसान है।

  • 15-20 मिनट के लिए धूप में बैठें।

  • आराम करें और कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें।

  • प्रतिदिन डेढ़ लीटर पानी पिएं

  • सभी भोजन गर्म (ठंडा नहीं) होना चाहिए।

 

ध्यान रखें कि कोरोना वायरस का पीएच लेवल 5.5 से 8.5 तक होता है। तो हम सभी को वायरस को खत्म करने के लिए और अधिक क्षारीय खाद्य पदार्थ खाने के लिए है, वायरस के एसिड स्तर से ऊपर।  जैसा कि;

  • केले, चूना   →     9.9 पी.एच.

  • पीला नींबू   →     8.2 पी.एच

  • एवोकैडो     → . 15.6 पी.एच

  • लहसुन       →   13.2 पी.एच

  • आम          →     8.7 पी.एच

  • मंदारिन      →     8.5 पी.एच

  • अनानास     →   12.7 पी.एच

  • वॉटरक्रॉस   →   22.7 पी.एच

  • संतरे          →     9.2 पी.एच


आप कैसे जानते हैं कि आपके पास कोविड -19 का खतरा हो गया है ?

  • गले में खुजली

  • सूखा गला

  • सूखी खांसी

  • उच्च तापमान

  • सांस लेने में कठिनाई

  •  गंध और स्वाद की हानि


सभी के लिए महत्वपूर्ण संदेश

  • आप जो गर्म पानी पीते हैं वह आपके गले के लिए अच्छा है।

  • लेकिन यह कोरोना वायरस आपकी नाक के पैरानासल साइनस के पीछे 3 से 4 दिनों तक छिपा रहता है।

  • हम जो गर्म पानी पीते हैं, वह वहां नहीं पहुंचता।

  • 4 से 5 दिनों के बाद यह वायरस जो पैरानासल साइनस के पीछे छिपा हुआ था, आपके फेफड़ों तक पहुंचता है।  फिर आपको सांस लेने में परेशानी होती है।

  • इसीलिए स्टीम लेना बहुत ज़रूरी है, जो आपके पैरानासनल साइनस के पीछे पहुँचता है।

  • आपको इस वायरस को भाप या स्टीम से नाक के अंदर ही मारना है।

  • 50°C पर, यह वायरस निष्क्रिय हो जाता है यानी लकवाग्रस्त हो जाता है।

  • 60℃ डिग्री सेल्सियस पर यह वायरस इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी मानव प्रतिरक्षा प्रणाली इसके खिलाफ लड़ सकता है।

  • 70°C पर यह वायरस पूरी तरह से मर जाता है। यह वही है जो आप स्टीम या भाप के माध्यम से करते है।


जो घर पर रहता है उसे दिन में एक बार भाप लेनी चाहिए।  

यदि आप सब्जियां खरीदने के लिए बाजार जाते हैं, तो इसे दिन में दो बार लें।

जो भी कुछ लोगों से मिलता है या कार्यालय जाता है उसे दिन में 3 बार भाप लेनी चाहिए।


स्टीम वीक

डॉक्टरों के अनुसार, कोविड -19 को कोरोनो वायरस को खत्म करने, नाक और मुंह से भाप निकालने से मारा जा सकता है। यदि सभी लोगों ने एक सप्ताह के लिए स्टीम ड्राइव अभियान शुरू किया, तो महामारी जल्द ही समाप्त हो जाएगी


तो यहाँ एक सुझाव है:

एक सप्ताह के लिए सुबह और शाम को प्रक्रिया शुरू करें, हर बार सिर्फ 5 मिनट के लिए, साँस लेना।  यदि सभी एक सप्ताह के लिए इस अभ्यास को अपनाते हैं तो घातक कोविड-19 मिट जाएगा। इस अभ्यास का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है।



 🙏


Disclaimer: The sole purpose of this blog is to create awareness on the subject and must not be used as a guide for taking or recommending any action or decision. A reader must do his own research and seek professional advice if he intends to take any action or decision in the matters covered in this blog.


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Wednesday, 7 April 2021

Importance of Covid19 Vaccination

 Recently there was a seminar about Covid immunity and vaccines at JIPMER, attended by experts immunologist like Dr Amita Aggarwal (SGPGI), Dr Andrew Pollard (UK), Dr N K Arora, Dr Gagandeep Kang (Vellore) and epidemiologist like Dr Muliyel (Vellore).


Based discussions held, this is what I am able to conclude:


1. Our current understanding about immunity following natural Covid infection, primarily based on our experience with previous SARS-CO1 and MERS infections showed that protective IgG antibodies rise after Covid infections. After 3-4 months, their levels go down to certain level which are usually detectable upto 2 years. (Titers known to protect against covid19 infection still remains unknown)


Specific T cell immunity which is equally important has been shown to persist even upto 17 years.


This simply means, in covid19, possibly recurrence of infection is an exception (very rare), not a rule.


Therefore, till now out of millions of infections, only 41 cases have been reported to have 2nd infection and none of them was severe infection.


We expect vaccine immunity to follow similar rules, set by natural infection with covid19.


2. Estimates based on R0 of SARSCOV2 says at least 70% of our population need to get immunity either by natural infection or by vaccination. Until this figure of 70% immunity is crossed, infection is unlikely to stop.


Recent ICMR seroprevalence study from India representing a wider population from various parts of the country (before vaccination started) has shown presence of protective antibodies in 35-40% of population in major cities and 10-20% in rural areas. 


This immunity has been non uniform, which means pockets of susceptible people are there in cities, more so in villages.


Any time this could lead to a surge of cases, like happening now in certain parts of India.


3. Out of >200 variants of covid19 known till now, only 3 have been found to be relevant - UK, Brazil and South Africa variants.


When serum of those who received Covishield, was seen whether it could neutralize these variant viruses, neutralization was ok (~90%) with UK and Brazil  variants. However for SA variant it was ~40-50%. Seems like the SA variant was about to escape these antibodies in significant proportion. 


But T cell response mounted by vaccine (by stimulating killing of entered virus) is expected to protect against severe infection (hospitalization and death).


Such variant responsible for 90-95% of infection in SA.


It's possible that newer variants could arise in future, which could circulate in India also.


It is possible that those who got vaccinated with Covishield (mounted immune response) or got immunity by natural infection may get infection by such variants, but they are very unlikely to develop a serious disease  (hospitalization and death) in future because of their protective T cell response.


So, vaccinated with Covishield or previously infected people could get mild infection by such variants but never a serious disease.


It has been shown that these variants have an increased rate of infection, (mainly in non immunized individuals) but not linked with severe disease.


Covexin being a whole cell vaccine is likely to provide better coverage against these variants.


4. If you see the trend of current rise in cases in India, rate of infection (per day) has increased to 0.4% from 0.1% (which was persisting from last few months). (In Cdg upto 0.9% from 0.1%). But fortunately the rate of death has not increased which persists to 0.1% only, like before, this is reassuring, for the moment.


5. But until we achieve immunity in 70% of our population, such future waves among susceptible population cannot be ruled out. Such waves will likely to continue at least for next 1-2 years (eventually viruses are expected becomes less lethal over a period of time).


6. Although current vaccine companies including Covishield will be producing newer versions of their vaccines in coming days (which will provide better coverage against these variants), currently we don't think any boosting with them will be an answer.


If the burden of variants causes significant disease (hospitalization and death) in those who had already achieved immunity in the past (which is something not expected at present), the answer will be to have a newer generation of vaccines which will provide much wider coverage.


What should be done in the present scenario:


a) After CDCs newer recommendations for vaccinated individuals, completely vaccinated asymptomatic individuals need not be asked to isolate themselves (for 1-2 weeks like before), as risk of asymptomatic infections after vaccination is very less. Symptomatic exposure should be tested, if negative, no isolation.


b) Although counting positive cases should continue (for epidemiology), but should not worry much. Worry should be if hospitalization and deaths increases.


c) We should insist on reporting Covid PCR along with CT values. 

(we know that CT value above 28 could be just because viral contamination, common to occur in asymptomatic positives, which has very limited risk of transmission to others.


RT PCR can be positive even if CT value is 32 and Gene expert with CT value of 42, which is positive but has no clinical relevance. 


Possibly we need to think about policy of not isolating those who are Covid pcr positive but having CT value more than 28. 


This could change the whole scenario.


d) Since the target at the moment is not to achieve 70% of immunity in the population (unless we could vaccinate whole population, almost an impossible task), focus need to be to protect the vulnerable from hospitalization and death i.e. above 65 and 50-65 with comorbidities.


Ensure those who are known to you get themselves vaccinated.


We need to learn to live with this, at least for a few more years.


God bless.


(Compiled by Dr Sanjay Verma, PGI, Chandigarh)


वरिष्ठ नागरिक

वरिष्ठ नागरिक .              आप जानते हैं कि मन चाहे कितना ही जोशीला हो पर साठ की उम्र पार होने पर यदि आप अपनेआप को फुर्तीला और ताकतवर समझते...