दूध ना पचे तो ~ सोंफ।
दही ना पचे तो ~ सोंठ।
छाछ ना पचे तो ~ जीरा व काली मिर्च।
अरबी (घुइयां) व मूली ना पचे तो ~ अजवायन।
कड़ी ना पचे तो ~ कड़ी पत्ता।
तैल, घी, ना पचे तो ~ कलौंजी...
पनीर ना पचे तो ~ भुना जीरा।
भोजन ना पचे तो ~ गर्म जल।
केला ना पचे तो ~ इलायची का उपयोग करें।
खरबूजा ना पचे तो ~ मिश्री का उपयोग करें...
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योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है।
कूबड़ निकलना - फास्फोरस की कमी।
कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है, फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं।
दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी।
सिजेरियन आपरेशन - आयरन, कैल्शियम की कमी।
अस्थमा, मधुमेह, कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं।
पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है।
जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें।
गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें।
मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए।
सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें।
अस्थमा में नारियल दें। नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है।दालचीनी + गुड + नारियल दें।
रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं।
हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है।
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हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे।
लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें।
ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।
किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये।
गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है। गिलास अंग्रेजो (पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है
RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता। कुएँ का पानी पियें। बारिस का पानी सबसे अच्छा, पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है।
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वात, पित्त, कफ
वात के असर में नींद कम आती है।
शाम को वात - नाशक चीजें खानी चाहिए।
भारत की जलवायु वात प्रकृति की है, दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।
कफ के असर में पढाई कम होती है।
पित्त के असर में पढाई अधिक होती है।
व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम, पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए। कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए।
निद्रा से पित्त शांत होता है, मालिश से वायु शांति होती है, उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास (लंघन) से बुखार शांत होता है।
आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा, आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है।
चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है।
त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त, कफ तीनो शांत होते हैं। इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना।
गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है।
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प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए।
जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं, उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है, क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है।
बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है, मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22%, तथा पसीना निकलने लगभग 70% शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं
सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है।
सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें।
पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है।
छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए, क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है, स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए।
रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा।
सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है, लकवा, हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है।
रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए।
जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है।
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HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा।
गर्मियों में बेल, गुलकंद, तरबूज, खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली, सोंठ का प्रयोग करें।
छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है।
तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का, दूध हमेशा पतला पीना चाहिए।
भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है।
कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है। ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है।
शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है।
भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है, क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है।
सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें।
अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें।
भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें।
अवसाद में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस की कमी हो जाती है। फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है।
पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है। हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है। हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है।
छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है।
मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें। त्रिकूट (सोंठ + कालीमिर्च + मघा पीपली) भी दे सकते हैं।
चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है।
दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है।
गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है।
जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए।
गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें।
मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है। दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें।
रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है।
भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है।
भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए। बाल जल्द सफेद नहीं होगा।
अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है।
अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें।
कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए।
बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है।
भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है।
सुबह के नाश्ते में फल, दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए।
रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए। जैसे - दाल, पनीर, राजमा, लोबिया आदि।
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जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी करती है।
शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें, भोजन के समय टी वी ना देखें।
स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है।
स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है।
तेज धूप में चलने के बाद, शारीरिक श्रम करने के बाद, शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है।
मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान व आग से दूर रहना चाहिए।
जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं।
जो बीमारी जितनी देर से आती है, वह उतनी देर से जाती भी है।
जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए।
एलोपैथी ने एक ही चीज दी है, दर्द से राहत। आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी, लीवर, आतें, हृदय खराब हो रहे हैं। एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है।
खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए, ब्लड-प्रेशर बढ़ता है।
रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें, पहले जामुनी, फिर नीला ..... अंत में लाल रंग।
चिंता, क्रोध, ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज, बबासीर, अजीर्ण, अपच, रक्तचाप, थायरायड की समस्या उतपन्न होती है।
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प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है। बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है।
इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है, जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है, इसे ना थूके।
वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा।
भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है।
जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है, वही मोक्ष का अधिकारी है।
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