Sunday, 16 July 2023

शयन विधान

 


शयन विधान
 
सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।
 
सोने की मुद्राऐं: 
           उल्टा सोये भोगी,
           सीधा सोये योगी,
           दांऐं सोये रोगी,
           बाऐं सोये निरोगी।
 
शास्त्रीय विधान भी है।
 
आयुर्वेद में वामकुक्षि की बात आती हैं,  
 
बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।
 
शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगडती है।
 
सोते समय कितने गायत्री मंन्त्र गिने जाए :-
 
"सूतां सात, उठता आठसोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।
 
"सात भय:-"
इहलोक,परलोक,आदान,
अकस्मात ,वेदना,मरण ,
अश्लोक (भय)
 
दिशा घ्यान:-
 
दक्षिणदिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं चाहिए यम और दुष्टदेवों का निवास है ।कान में हवा भरती है मस्तिष्क  में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति- भ्रंश, असंख्य बीमारियाँ होती है।
 
यह बात वैज्ञानिकों ने एवं वास्तुविदों ने भी जाहिर की है।
 
1:- पूर्व ( E ) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।
 
2:-दक्षिण ( S ) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ आरोग्य लाभ होता है
 
3:-पश्चिम( W ) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है
 
4:-उत्तर ( N ) में मस्तक रखकर सोने से हानि मृत्यु कारक  होती है
 
अन्य धर्गग्रंथों में शयनविधि में और भी बातें सावधानी के तौर पर बताई गई है
 
विशेष शयन की सावधानियाँ:-
 
1:-मस्तक और पाँव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिये।
 
2:-संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी चाहिए।
 
3:-शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी चाहिए।
 
4:-द्वार के उंबरे/ देहरी/थलेटी/चौकट पर मस्तक रखकर नींद लें।
 
5:-ह्रदय पर हाथ रखकर,छत के पाट या बीम के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा लें।
 
6:-सूर्यास्त के पहले सोना नहीं चाहिए।
 
7:-पाँव की और शय्या ऊँची हो तो अशुभ है।  केवल चिकित्स उपचार हेतु छूट हैं
 
8:- शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।
 
9:- सोते सोते पढना नहीं चाहिए।
 
10,:-ललाट पर तिलक रखकर सोना अशुभ है। (इसलिये सोते वक्त तिलक मिटाने का कहा जाता है। )
 
🙏🙏

(साभार - श्री उमेश गुप्ता)
 


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